अपने समाज की तारीफ करूं कैसे,
मेरे शब्दों में इतना जोर नहीं।
सारी दुनिया में जाकर ढूंढ लेना,
अपने समाज जैसा कोई समाज नहीं।
हृदय से समाज की सेवा करो,
आवाज ईश्वर तक जायेगी।
और ईश्वर ने जो सुन ली तो,
बिगड़ी बात बन ही जायेगी।
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